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Saturday, 6 June 2020

अमेरिका में पुलिस के हाथों गोरों की तुलना में तीन गुना अधिक अश्वेत मरते हैं, जेलों में 33% कैदी भी वे ही है

1960 के दशक के बाद अमेरिका अपनी सबसे व्यापक अशांति के दौर से गुजर रहा है। 25 मई को मिनियापोलिस में एक पुलिस अधिकारी के हाथों अश्वेत जार्ज फ्लायड की मौत के बाद 350 शहरों में दंगे भड़क उठे। इसके बाद कई दिन तक अमेरिकियों ने अपने पुलिस बल को जनसेवकों की बजाय एक हमलावर सेना के रूप में व्यवहार करते देखा।

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 1 जून को प्रकाशित लेख में लिखा है कि लोगों ने पुलिस के तौर-तरीकों में सुधार की दस साल से चल रही प्रक्रिया के विफल होने पर हताशा जताई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भीड़ की हिंसा को चुनाव में भुनाना चाहेंगे। वे अपनेसमर्थकों को भड़का रहे हैं।

नागरिकों के पासहथियार होने से पुलिस का काम कठिन हो जाता है

अमेरिका में नागरिकों के पास बड़ी संख्या में गन और अन्य हथियार होने से पुलिस का काम कठिन हो जाता है। 2000 से 2014 के बीच ड्यूटी पर 2445 पुलिस अधिकारी मारे गए। हर साल पुलिस की गोली से लगभग एक हजार व्यक्ति मारे जाते हैं। पुलिस के हाथों मारे जाने वाले लोगों में श्वेतों की तुलना में तीन गुना अधिक अश्वेत अमेरिकी होते हैं।

युवा अश्वेतों की मौत का छठवां प्रमुख कारण पुलिस हिंसा है। अश्वेतों को सजा मिलने की संभावना भी अधिक रहती है। एक ही अपराध के लिए उन्हें श्वेतों के मुकाबले सजा भी ज्यादा मिलती है। जेलों में 33% कैदी अश्वेत हैं। सजायाफ्ता लोगों में वयस्कों की आबादी के 13% अश्वेत शामिल हैं।

नागरिकों की मौत के मामले में कम अधिकारियों को सजा मिलती है

कई लोग इस असमानता को अमेरिका के पुलिस सिस्टम में रंगभेद का सबूत मानते हैं। मिनियापोलिस जहां जार्ज फ्लायड को पुलिस अफसर ने गले पर घुटना रखकर मार डाला, वहां पुलिस की ट्रेनिंग युद्ध लड़ने के समान होती है। नागरिकों की मौत के मामले में बहुत कम अधिकारियों को परिणाम भुगतना पड़ते हैं।

ब्राउन यूनिवर्सिटी के समाजशास्त्री निकोल गोंजालेज वान क्लीव और अमेरिकी सिविल लिबर्टी यूनियन के वकील सोमिल त्रिवेदी ने एक अध्ययन में कहा है कि प्रोसीक्यूटरों के लिए पुलिस मामले तैयार करती हैं। बदले में उनका रुख पुलिस के प्रति नरम रहता है। इस बार जिन कारणों से आग जल रही है, वे पहले भी थे। बड़ी संख्या में अश्वेत अमेरिकी अफ्रीकियों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। अश्वेतों के लिए अलग नियम लागू होते हैं।

आपराधिक न्याय का समूचा सिस्टम रंगभेदी हैः एक्टिविस्ट

एक्टिविस्ट आरोप लगाते हैं कि आपराधिक न्याय का समूचा सिस्टम रंगभेदी है। पुलिस यूनियन अपने दोषी सदस्यों का समर्थन करती हैं। इधर, देश में कई शहरों की पुलिस ने अधिकारियों को टकराव टालने और बल प्रयोग करने पर उसके लिए जिम्मेदार ठहराने के कदम उठाए हैं। कुछ अन्य स्थानों में ऐसा नहीं हो सका है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने परिवर्तन के दबाव को कम किया है।

अगर आज हो रहे विरोध प्रदर्शनों में दंगे चलते रहे जैसा कि 1968 में मार्टिन लूथर किंग की हत्या के बाद हुआ था तो अश्वेत बहुल जिलों में इससे नुकसान होगा। पहले ऐसा होते देख चुके अश्वेत नेता शहरों में प्रदर्शनकारियों को समझा रहे हैं कि वे अपने हितों को नुकसान ना पहुंचाएं। चुनावों में कई बार आदर्शवाद पर भय हावी हो जाता है।

डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि नवंबर के राष्ट्रपति चुनाव में ऐसा ही हो। उन्होंने व्हाइट हाउस के बाहर विरोध कर रहे लोगों से टकराने के लिए अपने समर्थकों को उकसाया। उनके समर्थक विरोध स्थल को युद्ध का मैदान बताते हैं।

2020 और 1968 में कई समानताएं

2020 और 1968 के अमेिरका में कुछ समानताएं दिखाई पड़ रही हैं। एक लाख से अधिक अमेरिकी कोरोना वायरस से मर चुके हैं। एक अंतरिक्ष मिशन ने अमेरिकी प्रतिभा और चतुराई की झलक दिखाई है। नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव में वोटरों को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर चुनाव लड़ने वाले रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रम्प और डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदें ना जगाने वाले प्रत्याशी के बीच चुनाव करना है।

1968 में फ्लू के वायरस ने अमेरिका में कहर ढाया था। चंद्रमा के लिए अपोलो 8 मिशन सफल रहा। लेकिन, अश्वेतों से अन्याय का विध्वंसकारी प्रभाव पड़ा था। 1968 में रिपब्लिकन रिचर्ड निक्सन ने ह्यूबर्ट हंफ्री को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर चुनाव में हरा दिया था। यह मुद्दा फिर से काम कर सकता है।

This story is auto-aggregated by a computer program and has been created or edited by India Today Live. Publisher:Dainik Bhaskar

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