ओबीसी के लिए आरक्षण का दायरा बढ़ाने की तैयारी में सरकार, कैबिनेट नोट तैयार, आखिरी फैसला प्रधानमंत्री करेंगे



केंद्र सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण का दायरा बढ़ाने जा रही है। क्रीमी लेयर तय करने के लिए सरकार सालाना आय की सीमा 8 लाख से बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने की तैयारी में है। यानी 12 लाख से कम आय वाले परिवार का सदस्य आरक्षण पा सकेगा। आय सीमा बढ़ाने काे बिहार चुनाव के लिए रणनीतिक तैयारी के ताैर पर देखा जा रहा है। 

संसद की एक समिति ने आय सीमा 15 लाख रु. करने की सिफारिश की थी। विशेषज्ञ समिति ने घटाकर 12 लाख रु. कर दिया। फाइल कैबिनेट सचिवालय से होते हुए पीएमओ पहुंच चुकी है। कैबिनेट नोट भी तैयार है, जिसे जल्द कैबिनेट की बैठक में रखा जा सकता है। इस मुद्दे पर मंत्रिसमूह में सहमति बन चुकी है। अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री करेंगे।


सरकार और पीएसयू की नौकरियों के बीच दर्जे की समानता पर फंसा पेच

आय सीमा बढ़ाने पर सहमति है। लेकिन, इसमें ओबीसी परिवार के किसी सदस्य के सार्वजनिक उपक्रम या पब्लिक सेक्टर बैंक की नाैकरी का वेतन शामिल करने का प्रस्ताव भी है। इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ भाजपा में बेचैनी है। नेता मानते हैं कि इस वेतन काे आय में जाेड़ने को विरोधी दल मुद्दा बना सकते हैं।

वेतन काे ओबीसी परिवार के वेतन का हिस्सा बनाने को लेकर सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों की नौकरियों के बीच दर्जे की समानता का मुद्दा भी जटिल है। मसलन, सरकार में कम वेतन के बावजूद कर्मचारी गजटेड के दायरे में आ जाते हैं, जबकि बैंकों में अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी उस स्तर के नहीं होते। यानी दोनों नौकरियों के बीच इक्वेलेंसी तय नहीं हुई है।

तमिलनाडु में 50% मेडिकल सीटें ओबीसी को देने की मांग पर सुप्रीम काेर्ट ने कहा- आरक्षण मौलिक हक नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार काे कहा कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। इसे संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत चुनाैती नहीं दे सकते। तमिलनाडु में मेडिकल सीटों पर ओबीसी छात्राें काे 50% आरक्षण देने की मांग पर सुनवाई से इनकार करते हुए काेर्ट ने यह टिप्पणी की। अन्नाद्रमुक, द्रमुक और माकपा की याचिकाओं पर गुरुवार काे जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई की।

याचिकाकर्ताओं के वकील पी विल्सन ने कहा, ‘हम काेर्ट से आरक्षण नहीं मांग रहे। हम ताे सिर्फ मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रावधान लागू करवाने का आग्रह कर रहे हैं। राज्य में ओबीसी आरक्षण लागू नहीं किया जा रहा। इससे मौलिक अधिकाराें का हनन हो रहा है।’

इस पर जस्टिस राव ने कहा, ‘इस मामले में सभी विरोधी दल एकजुट हैं। लेकिन, आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है।’

इस पर विल्सन ने कहा,‘नहीं, आरक्षण को मौलिक अधिकार की संज्ञा दे सकते हैं।’

नाराज जस्टिस राव ने कहा, ‘हम याचिका खारिज करें या आप वापस लेंगे। वापस लेंगे तो आपको मद्रास हाई कोर्ट जाने की छूट दे सकते हैं।’ याचिकाकर्ताओं ने अर्जी वापस ले लीं।

काेटे के लिए तीन राजनीतिक दलों ने लगाई थी याचिका

माकपा की तमिलनाडु इकाई ने मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों के अखिल भारतीय कोटे में राज्य द्वारा छोड़ी गई सीटों में ओबीसी, एससी और एसटी के लिए क्रमश: 50, 18 और 1% आरक्षण की मांग काे लेकर याचिका दायर की थी। द्रमुक और अन्नाद्रमुक ने भी ऐसी ही याचिकाएं दायर की थीं। अन्नाद्रमुक ने कहा था कि तमिलनाडु में ओबीसी को 50% आरक्षण के लाभ से वंचित रखना तर्कसंगत नहीं है।

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