साल 2100 तक देश का तापमान 4.4 डिग्री बढ़ जाएगा, चार गुना तक बढ़ जाएंगी लू।


  • आसमान से बरस रही आग, जीवन हुआ दूभर।
  • 40 डिग्री तक पहुंच रहा तापमान, झुलस रहे लोग। 
तापमान के 40 डिग्री तक पहुंच जाने से लोग गर्मी से बुरी तरह मुहाल नजर आ रहे हैं। तेज धूप शरीर को झुलसाने का काम कर रही है। भीषण गर्मी के कारण लोगों का पसीना सूख नहीं रहा है। दोपहर में तो लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। गर्मी से राहत पाने के लिए किए जा रहे सारे उपाय भी फेल हो रहे हैं। घरों में लगे कूलर व एसी भी कोई खास राहत नहीं दिला पा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार इन दिनों भीषण गर्मी अपने पूरे चरम पर है। तापमान भी 40 डिग्री तक पहुंच रहा है जिससे हालात विकट होजब गए हैं। पूरा शहर भीषण गर्मी की चपेट में आकर मुहाल हो रहा है। दिन निकलते ही गर्मी का प्रकोप शुरू हो जाता है, दोपहर में तो स्थिति ज्यादा विकट हो जाती है, तेज धूप लोगों के शरीर को झुलसाने का काम कर रही है, लोगों का पसीना सूख नहीं रहा है। घर से निकलने से पहले लोगों को सिर व मुंह को अच्छी तरह ढकना पड रहा है लेकिन राहत नहीं मिल पा रही है। धूप से बचने के लिए महिलाएं छातों का प्रयोग कर रही है। गर्मी से राहत पाने के सभी उपाय फेल हो रहे हैं। घरों में लगे एसी, कूलर व पंखे भी राहत नहीं दे पा रहे हैं। लोग आसमान में टकटकी लगाए रहते हैं, उनका कहना है कि अगर बारिश हो जाए तो इस बदन झुलसाती गर्मी से राहत मिल सके लेकिन बारिश के भी अभी कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इस उमस भरी गर्मी के कारण लोग परेशान हैं।

असेसमेंट ऑफ क्लाइमेट चेंज ओवर द इंडियन रीजन’शीर्षक से बनी एक रिपोर्ट को पुणे स्थित 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटिओरोलॉजी' ने तैयार किया है। इस रिपोर्ट की हर चार से पांच साल में समीक्षा होगी। इस रिपोर्ट को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन जारी करेंगे। 

क्लाइमेट चेंज की पहली रिपोर्ट:जानकारी के अनुसार साल 2100 तक देश का औसत तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा। लू चलने की घटनाएं तीन से चार गुना बढ़ जाएंगी।समुद्र का जलस्तर भी 1 फुट बढ़ जाएगा। तूफानों की तीव्रता व संख्या भी बढ़ जाएगी। इन सब बातों का खुलासा क्लाइमेट चेंज की भारत की पहली रिपोर्ट में किया गया है।

सदी के अंत तक न्यूनतम और अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी की संभावना: एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1986 से लेकर 2015 के बीच सबसे गर्म दिन (अधिकतम) और सबसे ठंडे दिन (न्यूनतम) के तापमान में क्रमश: 0.63 डिग्री और 0.4 डिग्री बढ़ोतरी हुई है। अगर यही परिस्थिति जस की तस रहती है, तो 1976 से 2005 की तुलना में वर्ष 2100 तक इनमें 55 से 70% बढ़ जाएगा। यानी सदी के अंत तक इन दोनों तापमान में क्रमश: 4.7 और 5.5 डिग्री बढ़ोतरी होने की संभावना है।

मानसूनी बारिश: परिस्थितियों के जस के तस रहने का मतलब यह है कि क्लाइमेट चेंज की वजह और ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 1951 से 2015 के बीच मानसूनी बारिश में भी 6% की कमी आई है।


Comments

Popular posts from this blog

8 जून से खुलेंगे धार्मिक स्थल,होटल, रेस्टोरेंट को भी खोलने की अनुमति, किन नियमो का करना होगा पालन

शामली में किया 6.86 करोड के विकास कार्यों का शिलान्यास

बडी संख्या में कोरोना पाॅजिटिव केस मिलने से मची खलबली

कोरोना संकर्मितो के मिलने से मस्तगढ, बिरालियान व हसनपुर को सील करने के निर्देश

लायंस क्लब द्वारा कोरोना योद्धाओं का किया गया सम्मान

कोरोना का कहर जारी,बर्तन व्यापारी की पत्नी मिली कोरोना पाॅजिटिव

सरकार देगी 7 प्रतिशत सब्सिडी के तहत लोन,जानिए क्या है योजना।