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Monday, 21 September 2020

जानिए विभिन्न राजनैतिक दलों व संगठनों ने क्यों किया केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

रालोद कार्यकर्ता ट्रेक्टर ट्राली लेकर कलक्ट्रेट परिसर अंदर आते हुए।

  • किसान यूनियन व रालोद कार्यकर्ता ट्रेक्टर ट्राली लेकर कलक्ट्रेट परिसर में जबरन घुसे।
  • विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ हुई नोकझोक।
  • केन्द्र व प्रदेश सरकार को किसान विरोधी बताते हुए जमकर नारेबाजी
  • जल्द बंद हो सकती है 1090 और 181 महिला हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं।

किसान यूनियन कार्यकर्ता ट्रेक्टर ट्राली लेकर कलक्ट्रेट परिसर में जबरन घुसते हुए।

शामली।केन्द्र सरकार द्वारा कृषि के तीन अध्यादेश लागू करने व प्रदेश में बढती बेरोजगारी के अलावा युवाओं को सरकारी नौकरी से वंचित कर संविदा पर भर्ती करने सहित किसानों के विभिन्न मुददों को लेकर मंगलवार को विभिन्न राजनैतिक दलों व संगठनों के लोगों ने शामली कलक्ट्रेट में हंगामा व प्रदर्शन करते हुए देश के राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम सदर संदीप कुमार को सौपे। इस दौरान राजनैतिक संगठनों के कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ नोकझोक भी हुई। वही किसान यूनियन व रालोद कार्यकर्ता ट्रेक्टर ट्राली लेकर कलक्ट्रेट परिसर में घुस आये और केन्द्र व प्रदेश सरकार को किसान विरोधी बताते हुए जमकर नारेबाजी भी है।
एसडीएम को ज्ञापन सौंपते सपा कार्यकर्ता।
समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष अशोक चैधरी के नेतृत्व में प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एसडीएम सदर संदीप कुमार को सौंपा। जिसमें उन्होंने कहा कि अनियोजित लाॅक डाउन के दौरान जो लाखों श्रमिक प्रदेश में अपने घर वापस आए, रोजगार के अभाव, आर्थिक तंगी, नौकरी न होने और कारोबारी व्यापार बंद होने से मजबूर होकर आत्महत्या कर रहे हैं। किसान, मजदूर, नौजवान, बुनकर, व्यापारी, छात्र महिलाएं, अल्पसंख्यक सभी बदहाल है। हत्या, लूट, अपहरण की घटनाएं रोज घट रही है। महिला व बच्चों से दुष्कर्म की वारदात बढ़ती जा रही है। समाजवादी सरकार के समय की 1090 और 181 महिला हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं भी भाजपा सरकार खत्म करने जा रही है। इसे रोका जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश में अराजकता एवं जंगलराज का बोलबाला है। अपराधी बेखौफ हैं और जनता के जानमाल की रक्षा में विफल है। प्रदेश में फर्जी एनकाउंटर और हिरासत में मौतों का सिलसिला निरंतर चल रहा है। विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न मामलों में सरकार संवेदनहीन रवैया अपना रही है। महंगाई चरम पर है। स्कूल कॉलेज बंद है। छात्रों का भविष्य अंधकार में है। सरकार  आरक्षण खत्म करने की साजिश कर रही है। टेक्निकल संस्थानों को प्राइवेट कंपनियों के हाथ में देना गलत कदम है। जो वापस होना चाहिए। सरकार गन्ना भुगतान को 14 दिन में करने के वायदों को पूरा नहीं कर पा रही। किसानों के हजारों करोड रुपए बकाया है। दूसरी ओर किसान अपने परिवार के लिए आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। किसानों की भूमि राजमार्गों में अधिग्रहण की गई है। उनका उचित मुआवजा किसानों की सहमति से तय कर दिया जाए और जबरदस्ती किसान की फसल को न उजाडा जाये। बिजली बिलों में पिछले दो-तीन वर्षो में बेतहाशा वृद्धि हुई है। उनके नाम पर विद्युत अधिकारियों द्वारा किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है। घरेलू विद्युत दरों में वृद्धि की गई है उसको वापस लिया जाए। कोरोना काल में स्वास्थ्य उपकरणों की जो खरीद हुई है जिसमें घोटाला सामने आ रहा है। उसकी जांच कराकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। शामली जिले के विकास खंड कैराना के 5 गांव कसेरवाकलां, कसरेवा खुर्द, टिटौली, बधेव, मुडेट व ऊन ब्लाक से ग्राम मालैंडी को विकास खंड परिवर्तित कर विकास खंड शामली में समायोजित संबंधित शासनादेश पिछली सरकार में जारी हो चुका है। जिसे तत्काल लागू किया जाए। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष अशोक चैधरी, जिला पंचायत सदस्य शेर सिंह राणा, पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अब्दुल गफ्फार, प्रदेश सचिव रविंद्र जोगी, विपिन सैनी, इजहार डोगर, जाबिर राव, उमेश प्रधान आदि मौजूद रहे।
प्रदर्शनकारियों को समझते पुलिस अधिकारी।

वहीं राष्ट्रीय लोकदल पदाधिकारियों ने देश के राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम सदर संदीप कुमार को सौंपा। जिसमें उन्होंने कहा कि पहले ही कर्ज के बोझ में दबे किसान को मारने के लिए केंद्र सरकार जो तीन ने कृषि अध्यादेश लाई है। इन अध्यादेशों से किसान और भी ज्यादा भुखमरी की कगार पर आ जाएगा। कोरोना जैसी महामारी में भी किसान ने खेत खलियान पर काम कर कर देश को जिंदा रखने का कार्य क्या है। उन्होंने कहा कि फार्म प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स ऑर्डिनेंस 2020 के तहत केंद्र सरकार एक देश एक कृषि मार्केट बनाने की बात कर रही है। इस अध्यादेश के माध्यम से किसान सीधे अपना माल कहीं भी दे सकता है। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि कृषि माल की बिक्री एपीएमसी यार्ड में होने की शर्त केंद्र सरकार ने हटा ली है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कृषि माल की जो खरीद एपीएमसी मार्केट से बाहर होगी। इसका अर्थ यह हुआ कि एपीएमसी मार्केट व्यवस्था धीरे-धीरे खत्म कर दी जाएगी। कृषि माल खरीदने वाले व्यक्ति और किसान के बीच विवाद होने पर किसान कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटा सकता। यह एक तरफ से किसान का शोषण होगा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी हमेशा सरकार के दबाव में रहते हैं और सरकार हमेशा व्यपारियों कि कंपनी के पक्ष में खडी रहती है। क्योंकि चुनाव के वक्त व्यपारी वे कंपनियां राजनीतिक पार्टियों को चंदा देती है। कोर्ट सरकार के अधीन नहीं होती और न्याय के लिए कोर्ट में जाने का हक हर भारतीय व्यक्ति को है। उन्होंने एसेशियल कमोडिटी एक्ट 1955 में संशोधन, फार्मर एग्रीमेंट ऑन प्राइस इंश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेस ऑडनेंस सहित सभी अध्यादेश ओं का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस अध्यादेश में किसान को फसल की एमएसपी मिलने की गारंटी नहीं है और न ही पूरी फसलों के बिकने की गारंटी है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं को चुनावी समय में बड़े बड़े वादे कर रोजगार देने की बात कही गई थी। वह भी जुमला साबित हो रही है। प्रदेश सरकार द्वारा रोजगार न मिलने से प्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है। सरकारी नौकरी खत्म कर संविदा पर रखने से नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष पेपर होने से भ्रष्टाचार बढ़ेगा। कानून व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। निजीकरण में आम आदमी टूट जाएगा। बेरोजगारी बढ़ेगी तो युवाओं के पक्ष में नहीं है। इस अवसर पर युवा प्रदेश महासचिव सचिन सरोहा, विशाल करौडी, पंकज सरोहा, सत्यवीर सिंह मलिक, राजन जावला, पवन कुमार, ओमवीर, सुधीर, सागर, नितिन पांचाल, मोनू कश्यप, नाजिम मलिक, शमशाद, सहदेव सिंह, रविंद्र पाल, जितेंद्र कुमार, सौरभ पवार, देवराज भैंसवाल आदि मौजूद रहे।
एसडीएम को ज्ञापन सौंपते राष्ट्रीय लोकदल कार्यकर्ता।

भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने देश के प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम सदर संदीप कुमार को सौंपा। जिसमें उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 5 जून को लागू किए गए अध्यादेशों का देश के किसान विरोध कर रहे हैं। वहीं सरकार द्वारा अध्यादेश को एक देश एक बाजार के रूप में कृषि सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन इन आदेशों को कृषि क्षेत्र में कंपनी राज्य के रूप में देख रही है। कुछ राज्य सरकारों द्वारा भी इस की संघीय ढांचे का उल्लंघन मानते हुए इन्हें वापस लिए जाने की मांग की जा रही है। देश के अनेक हिस्सों में इसका विरोध किसान कर रहे हैं। किसानों को इन कानून से कंपनी की बंधुआ बनाए जाने का खतरा सता रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि में कानून नियंत्रण, मुक्त विपणन, भंडारण, आयात निर्यात, किसान हित में नहीं है। इसका खामियाजा देश के किसान विश्व व्यापार संगठन के रूप में भी भुगत रहे हैं। देश में 1943-44 में बंगाल के सूखे के समय ईस्ट इंडिया कंपनी के अनाज भंडारण के कारण 40 लाख लोग भूख से मर गए थे। समर्थन मूल्य कानून बनाने जैसे कृषि सुधारों से किसान का बिचैलियों और कंपनी द्वारा किया जा रहा शोषण बंद किया जाए। भारतीय किसान यूनियन कृषि और किसान विरोधी तीनों अध्यादेश को वापस लेने की मांग करता है। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष कपिल खाटियान, जावेद तोमर, कुलदीप पंवार, योगेंद्र पंवार, तालिब चैधरी, संजीव राठी, अजीत निर्वाल, दीपक शर्मा, अमरदीप, तसव्वर अली, जाहिद हसन, पप्पू मलेंडी, सुरेश चंद, ओमपाल पटवारी, पदम केडी, आमिर राव, मुनव्वर हसन, ओमपाल रसीदगढ,शाहबाज अंसारी आदि मौजूद रहे।
केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते आप कार्यकर्ता।

आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने किसानों के हित के खिलाफ संख्या कम होने के बावजूद बिना वोटिंग के जबरन राज्यसभा में किसान विरोधी बिल को पास करने का विरोध करते हुए देश के राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम सदर संदीप कुमार को सौंपा। जिसमें उन्होंने कहा कि भारतीय संसद में संवैधानिक तरीके से पारित एग्रीकल्चर कृषि अध्यादेश से जय जवान और जय किसान का नारा लगाने वाले देश के किसानों की बदहाली में एक और काला अध्याय जोड़ने का काम केंद्र में बैठी भाजपा सरकार के द्वारा किया गया। केंद्र में बैठी भारतीय जनता पार्टी की सरकार को किसानों की कोई चिंता नहीं है। किसान विरोधी यह काला कानून उनका जीता जागता प्रमाण है। कृषि सेक्टर को प्राइवेट हाथों में देने के लिए यह बिल लाया गया है। इससे एमएसपी खत्म हो जाएगी। एग्रीकल्चर कृषि अध्यादेश को लेकर केंद्र सरकार द्वारा कहा गया है कि किसानों के लिए यह क्रांतिकारी बिल है। लेकिन सच बात यह है कि कृषि जो हमारे देश की जीवन रेखा है। 80 प्रतिशत लोग जो गांव में रहते हैं वह कृषि पर निर्भर है उनको पूंजीपतियों के हाथों में देने के लिए लाया गया है। इसकी वजह से धान, गेहूं व अन्य फसलों पर मिलने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म हो जाएगा। बिल में पूंजी पतियों को खुली छूट दी जाएगी कि आप आइए और कृषि क्षेत्र को अपने कब्जे में कर लीजिए। उन्होंने उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने वाले काले कानून को वापस लिए जाने की मांग की है। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष राजेंद्र पहलवान, वीरपाल उपाध्याय, सचिन मलिक, सत्येंद्र कुमार, संजीव चैहान, विनोद वालिया, योगेश कुमार, ओमपाल कश्यप, बबलू कश्यप, रोहित कुमार कश्यप आदि मौजूद रहे।
 भारी संख्या में कलक्ट्रेट परिसर में तैनात पुलिसकर्मी।

गन्ना विकास परिषद शामली के चेयरमैन वीरसिंह मलिक ने दर्जनों पदाधिकारियों को साथ लेकर देश के राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम सदर संदीप कुमार को सौंपा। जिसमें उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किसान संबंधित जो अध्यादेश लागू किया गया है। उससे देश का किसान बहुत आहत है। जो किसान विरोधी कानून है। जिससे देश के किसान की आर्थिक हालत दयनीय हो जाएगी और किसान नए-नए कानून लागू होने से परेशान हो जाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए काला कानून को वापस लिए जाने की मांग की है। इस अवसर पर सत्येंद्र कुमार, मांगेराम, रोहित मलिक, रघुवीर सिंह, पुष्पेंद्र कुमार, प्रदीप मलिक, शैलेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।

   केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते सपा कार्यकर्ता।

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